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Poetry in Hindi तेरी खता नहीं जो तू गुस्से में आ गया

 Poetry in Hindi Teri khata nahi jo tu gusse me aa gya written by:- Mahshar Afridi 


 Hindi Poetry 

तेरी खता नहीं जो तू गुस्से में आ गया

पैसे का ज़ोम था तेरे लहजे में आ गया।

सिक्का उछाल के तेरे पास क्या बचा

तेरा गुरुर तो मेरे कांसे में आ गया।

यूँ  तो बहुत उदास था मुझसे रूठकर

मैंने मनाना चाहा तो नखरे में आ गया।

दोनों कबीले जंग को तैयार थे की बस

फिर यूँ  हुआ की फिर वो मेरे खेमे में आ गया।

बहुत उदास था मुझसे रूठकर


Teri khata nahi jo tu gusse me aa gya

paise paise ka jom tha tere lahje me aa gya

sikka uchhal ke tere paas kya bcha 

tera garur to mere kanse me aa gya

yu to bahut udas tha mujhse rooth kar

maine mnana chaha to nakhtre me aa gya

dono kabile jung ko tyra the ki bas

fir yun hua kki wo mere kheme me aa gya 


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